Tag: देसी भाभी

छैल छबीली-2

उसने उसके पास जाकर उसका ढीला ढाला लण्ड रबड़ की तरह पकड़ कर हिला दिया. फिर उसने उसकी पीठ पर दो तीन घूंसे मारे दिये. ‘साला… हरामी… हीजड़ा…!’ ‘बस गाली मत दे… चल आ जा…!’ ‘यो हराम जादो, मेरे हागे सोई ही ना सके… बड़ा मरद बने है!’ वो धीरे से सुबक उठी और मेरे […]

गलतफहमी-1

मेरी शादी हो गई है, 5.7 इंच की हाईट है, सात इंच का थोड़ा मुड़ा हुआ, सख्त लिंग है मेरा… मेरी गठीली शारीरिक रचना से भी आप सभी वाकिफ ही हैं, और विस्तार से कहानी में मेरा रोल आने पर बता दूंगा। फिलहाल मैं रेडीमेड कपड़े की दुकान का मालिक हूँ, दुकान सामान्य सी है […]

गलतफहमी-3

दूसरे दिन 11 बजे भाभी का फोन आया, मैंने कहा- हाँ तनु बोलो.. मैं तुम्हारे ही फोन का इंतजार कर रहा था। कल के लिए सॉरी..! भाभी ने कहा- कोई बात नहीं, मुझे बुरा नहीं लगा। हाँ सुनो, अब मैं तुम्हें रोज मयंक के स्कूल जाने के बाद इसी समय फोन करुंगी। मैंने फिर कहा- […]

गलतफहमी-2

तब उन्होंने इत्मिनान की गहरी सांस ली और अगले ही पल उदास होते हुए कहा- संदीप, बुरा मत मानना, मैं घर में अकेले बोर हो जाती हूं, पड़ोस की औरतें एक दूसरे की चुगली में लगी रहती हैं इसलिए उनके साथ भी अच्छा नहीं लगता, और मयंक (उनका बेटा) तो स्कूल गया रहता है, और […]

सामने वाली खिड़की

22 साल की थी, जब मेरी शादी विवेक से हुई। अच्छा हट्टा कट्टा मर्द, मेरी खूब रेल बनाई। पहले पहले तो डर भी बहुत लगा, दर्द भी बहुत हुआ, मगर जब मशीन रवां हो गई, फिर मैंने विवेक की रेल बनाई। वो खुद कहते हैं ‘साली तेरा पेट नहीं भरता चुदवा चुदवा के…’ मेरा जवाब […]

ट्रेन की सीट से चूत चुदाई की कहानी

तभी उस ने मुझ से मेरा मोबाइल मांगा, बोला कि फ्रेंड को जरूरी कॉल करनी है. मैंने अपना मोबाइल उसे दे दिया. पर एक काल करने के बाद बिना बात किये उस ने मेरा मोबाइल लौटाते हुए कहा कि मेरी सहेली ने कॉल रिसीव नहीं की. ट्रेन चलती रही और मैंने उस के चूतड़ों से […]

सम्भोग से आत्मदर्शन-5

अब मेरे पास कहने को कुछ नहीं था फिर भी मैंने कहा- अभी तो तुम्हारे हक का बहुत कुछ बाकी है, तुम्हारे हक में कटौती नहीं करेंगे। और मैंने उसकी पेंटी उतारनी शुरू कर दी, उसने भी मेरा साथ दिया, पेंटी उतार कर मैंने उसके पेट पर गिरा अपना वीर्य साफ किया और अपने लिंग […]

सम्भोग से आत्मदर्शन-21

इस तरह से किसी भी महिला को उठा पाना बहुत मुश्किल होता है, अगर प्रेरणा पतली दुबली ना होती तो शायद मैं भी उसे नहीं उठा पाता, और फिर प्रेरणा सहयोगी स्वभाव की भी थी, इसलिए मैं उसे अच्छे से सम्हाल पा रहा था। कुछ देर इसी तरह जम कर चूसना चाटना हुआ, फिर मैंने […]

अधूरी ख्वाहिशें-1

लेकिन सीधे सादे सेक्स में बताने लायक कुछ होता नहीं.. बताया तो वही जाता है जो कुछ ख़ास हो, अलग हो.. जैसे गौसिया के साथ गुज़रे पल या शीला की जिंदगी के कडुवे सच। बहरहाल, इन पौने दो साल में कुछ अफ़साने बने तो सही जो बताने लायक हैं.. जो मन गुदगुदाने लायक हैं। जैसा […]

पेयिंग गेस्ट से कामवासना की तृप्ति-2

मैं उसको बिल्कुल विरोध नहीं कर रही थी तो सुहास का डर कम हो रहा था। उसका हाथ मेरे कड़े हुए निप्पस को छेड़ रहा था। उसने अपने हाथ से मेरे स्तनों का नाप लेने की तैयारी शुरू कर दी। मुझे समझ में ना आये, इतना वह मेरे दोनों स्तन पर हाथ स्पर्श करने लगा। […]